July 17, 2026

चारधाम यात्रा में फर्जी जज बनकर घूमना पड़ा भारी, कोर्ट ने सुनाई दो साल की कठोर कैद, शीतल हत्याकांड के दोषी को भी सजा

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अविनाश मोहन गुप्ता और ज्योति दुबे ने खुद को लखनऊ का सिविल जज बताकर चारधाम यात्रा में सुविधाओं का अवैध लाभ लिया था

रुद्रप्रयाग: चारधाम यात्रा के दौरान स्वयं को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का अवैध लाभ लेने वाले दो आरोपियों को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. न्यायालय ने दोनों पर अर्थदंड भी लगाया है. जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

चारधाम यात्रा में फर्जी जज बनकर घूमना पड़ा भारी: अभियोजन के अनुसार वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा के दौरान थाना गुप्तकाशी पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद कार में सवार कुछ लोग स्वयं को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर क्षेत्र में सरकारी रुतबे का इस्तेमाल कर रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस ने वाहन को रोककर जांच की. पूछताछ के दौरान चालक ने अपना नाम अविनाश मोहन गुप्ता बताते हुए स्वयं को सिविल जज, लखनऊ बताया, जबकि साथ बैठी महिला ने अपना नाम ज्योति दुबे बताया. पुलिस द्वारा न्यायिक सेवा से संबंधित पहचान पत्र मांगे जाने पर प्रस्तुत आईकार्ड संदिग्ध पाए गए. इसके बाद वाहन की तलाशी ली गई, जिसमें आगे-पीछे लगे उत्तर प्रदेश शासन के बोर्ड, फ्लैश लाइट, हूटर, तिरंगा झंडा तथा 17 मोबाइल फोन बरामद हुए.

कोर्ट ने सुनाई दो-दो साल की कठोर कैद: जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दोनों आरोपी फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर सरकारी सुविधाओं और विशेषाधिकारों का अनुचित लाभ उठा रहे थे. इसके बाद थाना गुप्तकाशी में उनके विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया. विवेचना पूर्ण होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया. ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 15 गवाहों के बयान तथा मजबूत दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए. राज्य सरकार की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी/सहायक लोक अभियोजक प्रमोद चंद्र आर्या ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने बताया कि-

सिविल जज (सीडी)/जेएम रुद्रप्रयाग (Civil Judge (Junior Division) / Judicial Magistrate) अभिजीत कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 16 जुलाई 2026 को अपना फैसला सुनाया. न्यायालय ने अविनाश मोहन गुप्ता और ज्योति दुबे को दोषी करार देते हुए दो-दो वर्ष के कठोर कारावास तथा अर्थदंड की सजा सुनाई. साथ ही स्पष्ट किया कि जुर्माना जमा न करने की स्थिति में दोनों को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
-प्रमोद चंद्र आर्या, सहायक लोक अभियोजक-

यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि सरकारी पद का फर्जीवाड़ा कर कानून को गुमराह करने और सरकारी सुविधाओं का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ न्यायालय सख्त रुख अपनाएगा.

देवर के शीतल हत्याकांड में दोषी नेपाली मजदूर को उम्रकैद: रुद्रप्रयाग जनपद के बहुचर्चित देवर हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय रुद्रप्रयाग ने हत्या के दोषी नेपाली नागरिक अतवारू थारू (34 वर्ष) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. न्यायालय ने दोषी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा. मामले में राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुदर्शन चौधरी ने प्रभावी पैरवी की.

जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीना अग्रवाल की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सशक्त साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हत्या का दोषी ठहराया. न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध कर दिया है. मामले में फैसला 13 जुलाई 2026 को सुनाया गया, जबकि विस्तृत आदेश 16 जुलाई 2026 को पारित किया गया.

बेलचे के वार से हुई थी सहकर्मी की मौत: अभियोजन के अनुसार, 13 मार्च 2025 की रात करीब नौ बजे गुप्तकाशी थाना क्षेत्र के देवर गांव में सड़क निर्माण कार्य में लगे नेपाली मजदूरों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी अतवारू थारू ने अपने ही सहकर्मी शीतल उर्फ संतोष ओली के सिर पर बेलचे से जोरदार वार कर दिया. गंभीर रूप से घायल शीतल को पहले स्थानीय अस्पताल, फिर श्रीनगर मेडिकल कॉलेज और बाद में देहरादून रेफर किया गया, जहां 14 मार्च 2025 को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. शीतल के चाचा कर्ण बहादुर की तहरीर पर 16 मार्च 2025 को थाना गुप्तकाशी में मुकदमा दर्ज किया गया. विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया.

8 गवाह, मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्यों ने खोली आरोपी की पोल: ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य, घटनास्थल से बरामद सामग्री तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए. अदालत ने माना कि सभी साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और आरोपी द्वारा बेलचे से किया गया जानलेवा हमला पूरी तरह सिद्ध होता है.

बचाव पक्ष की दलील खारिज: बचाव पक्ष ने दावा किया कि शीतल शराब के नशे में पत्थर से टकराकर गिरा था और आरोपी को झूठा फंसाया गया है. लेकिन न्यायालय ने चिकित्सकीय रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों के आधार पर इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि मृतक के सिर पर आई गंभीर चोटें सामान्य रूप से गिरने से संभव नहीं थीं, बल्कि वे किसी भारी धारदार औजार से किए गए प्रहार के अनुरूप थीं. इससे यह निर्विवाद रूप से सिद्ध होता है कि आरोपी ने जानलेवा हमला किया था. न्यायालय ने आरोपी को ट्रायल के दौरान जेल में बिताई गई अवधि का लाभ देने का भी आदेश दिया है. साथ ही कानून के तहत निर्धारित अवधि के भीतर उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार भी सुरक्षित रखा गया है.

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